अगर एमएसपी में बदलाव हुआ तो तुरंत इस्तीफा दे दूंगा: दुष्यंत चौटाला

BY- FIRE TIMES TEAM

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सोमवार को कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य, या एमएसपी को समाप्त करने पर तीन कृषि संबंधी बिलों में एक भी लाइन नहीं थी, और दावा किया कि अगर एमएसपी से छेड़छाड़ हुई तो वे तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

चौटाला ने पीएम मोदी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि एमएसपी पर ही फसलों की खरीद की जाएगी, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसानों को उनकी फसल की बाजार में अधिक कीमत मिल रही है तो वे अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं।

दुष्यंत चौटाला, जो जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं, ने विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने भी पहले किसानों के लिए एक खुले बाजार का समर्थन किया था।

जननायक जनता पार्टी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाले हरियाणा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी है।

देश के विभिन्न राज्यों में खेती के तीन बिलों के खिलाफ किसानों के विरोध के बीच चौटाला की टिप्पणी आई है।

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रविवार को, जननायक जनता पार्टी के दो नेता, बरवाला विधायक जोगी राम सिहाग और शाहाबाद विधायक राम करन काला, राज्य में किसानों के विरोध में शामिल हुए थे।

सिहाग ने हिसार जिले के सरसोद गांव के पास एक विरोध प्रदर्शन में भाग लिया और उन्होंने कब की अगर मेरे निर्वाचन क्षेत्र के लोग मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहते हैं, तो मैं उसी समय इस्तीफा दे दूंगा।

सिहाग ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह बिल किसान समर्थक था लेकिन जब मैंने तीनों प्रस्तावित कानूनों का अध्ययन किया तब लगा कि बिलों को वापस लिया जाना चाहिए।

सिहर ने कहा कि वह इस मामले को पार्टी की बैठक में उठाएंगे।

बरवाला के एमएलए ने कहा, “किसान अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हैं क्योंकि उनके पास अपने घरों में स्टॉक रखने के लिए जगह नहीं है।”

उन्होंने कहा, “बड़े पूंजीपति गेहूं और धान की पूरी उपज खरीद लेंगे। तब सरकार के पास कुछ नहीं बचेगा। यह मंडियों में भी उपलब्ध नहीं होगा। अगर खाद्यान्न 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध है, तो मजदूर कैसे खरीद पाएंगे?”

इस बीच, विधायक काला अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक धरने का समर्थन करने गए और उन्होंने कब कि मैंने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष उठाया जाएगा।

करनाल में, किसानों ने रविवार को दोपहर और 3 बजे के बीच 10 स्थानों को अवरुद्ध किया था। उन्होंने बिल को किसानों के खिलाफ होने का भी दावा किया।

विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले किसान फूल सिंह ने कहा कि बिल किसानों के खिलाफ हैं और केंद्र जल्दबाजी में किसानों और आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) के साथ चर्चा किए बिना लागू कर रही है।

तीन बिल हैं: किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक पर किसान (अधिकारिता और संरक्षण) समझौता।

हरियाणा और पंजाब में हजारों किसान विवादास्पद कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं। लोकसभा में बिलों को पहले ही मंजूरी दे दी गई थी, और विपक्ष के भारी हंगामे के बीच, उनमें से दो को राज्यसभा में पारित भी कर दिया गया है।

पंजाब के किसानों ने गुरुवार को घोषणा की कि वे तीन बिलों के विरोध में 24 सितंबर से 26 सितंबर तक तीन दिवसीय रेल रोको आंदोलन करेंगे।

प्रदर्शन का आह्वान किसान मजदूर संघर्ष ने दिया है। पंजाब के अन्य किसान संगठनों ने बिलों के विरोध में 25 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है।

भाजपा की पंजाब की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल भी बिल के खिलाफ है। गुरुवार को लोकसभा में बिल पास होने के बाद शिरोमणि अकाली दल की सदस्य केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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