तमिलनाडु: एमके अलागिरी पर क्यों टिकी हैं अमित शाह की नजरें?

 BY-FIRE TIMES TEAM

तीन स्तरीय सुरक्षा के साथ, चेन्नई शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह की तमिलनाडु यात्रा के दौरान एक किले में बदल गया। दोपहर 1:40 बजे चेन्नई में उतरने वाले अमित शाह राज्य इकाई के पदाधिकारियों और कोर कमेटी को संबोधित करने के लिए तैयार हैं।

अमित शाह की चेन्नई यात्रा के लिए तीन अतिरिक्त आयुक्त, चार संयुक्त आयुक्त, 16 डिप्टी कमिश्नर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा के लिए 3000 पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। बम निरोधक दस्ता भी जगह-जगह जा चुका है।

पूर्व डीएमके सांसद केपी रामलिंगम, जिन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था, के भी अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा में शामिल होने की उम्मीद है।

रामलिंगम को पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन ने इस साल मार्च में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत पार्टी से निलंबित कर दिया था। रामलिंगम ने कोरोनोवायरस महामारी पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने के स्टालिन के प्रस्ताव के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए थे। 2014 में एम. के. अलागिरी को अपना समर्थन दिखाने के लिए रामलिंगम को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।

कौन हैं अलागिरी?

अलागिरी तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) सुप्रीमो रहे करुणानिधि और उनकी दूसरी पत्‍नी दयालु अम्‍मल के बेटे हैं। अलागिरी तमिलनाडु में कैबिनेट मंत्री तक रह चुके हैं।

2009 में मदुरै से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे अलागिरी को केंद्र में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। करुणानिधि हमेशा राजनीतिक मामलों में स्‍टालिन को आगे करते रहे। इससे अलागिरी की नाराजगी बढ़ती रही।

2014 में करुणानिधि ने अलागिरी को पार्टी से बाहर कर दिया था। 2018 में जब करुणानिधि का निधन हुआ तो अलागिरी ने यहां तक कह दिया था कि स्‍टालिन के नेतृत्‍व में पार्टी बर्बाद हो जाएगी।

रामलिंगम 1996 में द्रमुक उम्मीदवार के रूप में लोकसभा के लिए चुने गए थे। उन्हें 2010 में DMK ने राज्यसभा के लिए नामित किया था। DMK के साथ उनके कार्यकाल से पहले, वह 1980 और 1984 के बीच AIADMK विधायक थे।

करुणानिधि के परिवार में मची उठा पटक का फायदा बीजेपी अपने पक्ष में करना चाहेगी। रामलिंगम को पार्टी में शामिल करके वह तमिलनाडु के कई दिग्गजों तक आसानी से पहुंच जाएगी।

डीएमके को कमजोर करके बीजेपी एनडीए को मजबूत करने में जरा सा भी पीछे नहीं हटेगी। इसी वजह से वह करुणानिधि के बेटे को अपने साथ हर हाल में लाना चाहते हैं।

अलागिरी के बीजेपी के साथ आने से काफी कुछ बदल सकता है तमिलनाडु में। पार्टी के अंदर जो नेता स्टालिन को पसंद नहीं करते हैं वह भी साथ छोड़कर एनडीए का रुख कर सकते हैं।

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