जज्बे को सलामः गोरखपुर की स्निग्धा नेट क्वालीफाई करने वाली यूपी की पहली थैलेसीमिया पीड़ित

BY – FIRE TIMES TEAM

कहते हैं कि यदि मन में सच्ची लगन हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है, चाहे रास्ते में लाख कठिनाईयां हों। ऐसी ही मिसाल हैं गोरखपुर की स्निग्धा जो कि थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इसके बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) क्वालिफाई कर दिखा दिया कि सपनों को देखने के साथ ही उसे साकार भी किया जा सकता है।

नेट सामान्य विद्यार्थी के लिए तो सामान्य पात्रता परीक्षा ही है। लेकिन स्निग्धा को जो बीमारी है वह उनके लिए हर पल जान जाने के खतरे की तरह है। ऐसे मेें यह उपलब्धि उनके और परिवार के लिए बड़ी बात है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के जेल रोड स्थित स्निग्धा चटर्जी एलआईसी अभिकर्ता सनत चटर्जी की बेटी हैं। 23 वर्षीय स्निग्धा ढाई माह की उम्र से मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा पास करने वाली यूपी की पहली थैलेसीमिया मरीज हैं।

स्निग्धा को हर 15 दिन पर 2 यूनिट खून चढ़वाने के लिए लखनऊ के पीजीआई जाना पड़ता है। यदि दो दिन की भी देरी हो जाये तो सांस उखड़ने लगती है। इसके बावजूद उसने कभी भी इस बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

स्निग्धा ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट 80 फीसदी से ज्यादा अंको से पास किये। और बीकाम प्रथम श्रेणी के बाद एमकाम के बाद सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता परीक्षा पास कर ली है। अब वह जेआरएफ के लिए प्रयासरत है।

पिता सनत चटर्जी बताते हैं कि जब स्निग्धा ढाई महीने की हुई तब जांच के दौरान पता चला कि वह मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित है। उन्होंने उसका पूरा इलाज कराने का प्रयास किया, लेकिन पता चला कि यह बीमारी तो लाइलाज है। और महीने में 2 से 3 बार ब्लड ट्रांसफ्यूज कराना ही पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो उसकी जान को खतरा हो सकता है।

पिता का कहना है कि ब्लड चढ़ाते समय अक्सर स्निग्धा के शरीर में आयरन की अधिकता हो जाती है। ऐसे में लखनऊ पीजीआई ही ऐसा संस्थान है जो आयरन को ब्लड से अलग कर सकता है।

 

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