‘बॉयज लॉकर रूम’ जहां स्कूली बच्चे सामूहिक दुष्कर्म की करते थे प्लानिंग, देश के लिए कितना खतरनाक?


BY- FIRE TIMES TEAM


भारत महिला सुरक्षा के मामले में दुनिया का सबसे खतरनाक देश है। यह सीरिया, अफगानिस्तान जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा हो गया है। 2013 में भारत महिलाओं के मामले में दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक देश था।

मोदी सरकार आने के बाद महिला सुरक्षा के मामले में देश की साख गिरी है जबकि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं सरकार चला रही है।

हर साल लाखों की संख्या में बालात्कार होते हैं जिनमें हज़ारों केस रजिस्टर्ड ही नहीं हो पाते। हर 15 मिनट पर यहां एक बालात्कार की घटना की रिपोर्ट होती है।

बालात्कार के इतने ज्यादा मामले आने के बाद अब बॉयज लॉकर रूम का मुद्दा काफी गरम हो गया है। निजी चैट समूह के लीक स्क्रीनशॉट ने देश एक बार फिर दुष्कर्म जैसे घिनौने मामले को तूल दे दिया है।

क्या है बॉयज लॉकर रूम: कुछ स्कूली छात्रों ने इंस्टाग्राम पर एक ग्रुप बनाया जिसका नाम बॉयज लॉकर रूम रखा गया। यह स्कूली बच्चे 17-18 साल की उम्र के हैं जो अभी 12वीं पास नहीं हुए थे। इन बच्चों ने इस ग्रुप में लड़कियों से संबंधित आपत्तिजनक तश्वीर साझा करते थे और सामूहिक दुष्कर्म की बात भी करते थे।

इस बात का खुलासा तब हुआ जब एक ट्वीटर यूजर ने इस ग्रुप के स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर साझा कर दिया और देखते ही देखते मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद ट्वीटर पर #BoysLockerRoom भी ट्रेंड करने लगा।

जिस यूजर ने स्क्रीनशॉट शेयर किया है वह एक लड़की है और दक्षिणी दिल्ली में रहती है। उस लड़की ने पोस्ट को साझा करते हुए लिखा था ‘दक्षिणी दिल्ली के 17-18 साल की उम्र के लड़कों का यह एक ग्रुप है जिसका नाम बॉयज लॉकर रूम है जहां कमसिन लड़कियों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक बनाया जा रहा था। मेरे स्कूल के दो लड़के इसका हिस्सा हैं।”

उस लड़की ने ग्रुप में शामिल लड़कों की सूची और उनके चैट के स्क्रीनशॉट को भी साझा किया।

क्या हो सकती है कानूनी कार्यवाही: 

2019 में इसी तरह का मामला सामने आया था जिसमें कुछ युवा लड़कों को सहपाठियों की टिप्पणी के लिए स्कूल से निलंबित कर दिया गया था।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 ई के अनुसार जब भी कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति के निजी क्षेत्र की छवि को उसकी सहमति के बिना प्रकाशित, प्रसारित करता है तो उस व्यक्ति की गोपनीयता का उल्लंघन करने के लिए उसे कारावास व दो लाख रूपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के अनुसार अगर कोई भी किसी महिला को अपमानित करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करता है तो उस व्यक्ति को कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकता है ।

यह बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार महिलाओं की यौन उत्पीड़न की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है।

इन घटनाओं में अब नाबालिकों का शामिल होना चिंता का विषय है।

अब कानून भी कटघडे में खड़ा होगा जब उचित न्याय पीड़िता को नही मिलेगा। क्योंकि अगर अभियुक्त नाबालिक है तो उस पर दंडात्मक कार्यवाही सम्भव नहीं होगी ,सिर्फ उसको सुधार गृह में रखा जाएगा।

कानूनविदों को एक बार फिर आपराधिक न्याय प्रणाली को देखने की जरूरत है ।

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