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मोदी सरकार की नीतियों का परिणाम; 22 साल बाद मूडीज ने घटाई भारत की रेटिंग


BY- FIRE TIMES TEAM

मोदी सरकार के बनने के बाद इस प्रकार से प्रचार-प्रसार किया गया कि देश काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोरोना संकट में भी मोदी सरकार 2.0 के पहले साल की उपलब्धियों को बीजेपी बढ़ा-चढ़ाकर जनता को परोस रही है। देश की वास्तविक स्थिति के इतर सब कुछ सही होने का प्रचार किया जा रहा है।

अब रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स समिट ने भारत की रेटिंग को करीब दो दशक के बाद पहली बार घटाया है। इस एजेंसी ने भारत की राष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग को बीएए-2 से घटाकर बीएए-3 कर दिया है।

इससे पहले मूडीज ने 1998 में भारत की रेटिंग घटाई थी। मोदी सरकार के बनने के बाद एक लंबे अंतराल के पश्चात मूडीज ने भारत की रेटिंग को बीएए-3 से बीएए-2 किया था। मोदी सरकार के मात्र छह साल के शासन में ही रेटिंग घट गई।

निवेश के हिसाब से बीएए-3 रेटिंग सबसे घटिया मानी जाती है। इसके नीचे वाली रेटिंग को निवेश के लायक नहीं माना जाता है। रेटिंग के घटने से भारत में निवेश कम हो सकता है। चीन से निकल कर बहुत सारी कंपनियां जो भारत आने की सोच रही थीं वो शायद अब आने से बचें।

मूडीज के अनुमान के मुताबिक भारत की जीडीपी में चार प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। भारत की यह स्थिति करीब 40 साल बाद होगी जब पूरे साल जीडीपी में गिरावट देखने को मिलेगी।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, फिच रेटिंग्स और स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने अभी जल्द ही भारत की रेटिंग को मूडीज से भी कम दिया है।

कोरोना संकट के बीच बहुत सारे निवेश भारत को एक विकल्प के तौर पर देख रहे थे। जिस प्रकार से राज्य सरकारों ने मजदूरों के अधिकार से संबंधित कानून समाप्त किए हैं उससे अंदाजा भी था कि काफी निवेश होगा।

अब जब रेटिंग कम कर दी गई है तो कहीं-न-कहीं निवेशक सतर्क ही जायेगा और शायद वह अन्य विकल्पों की तलाश करे।

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मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले समय में नीति निर्माताओं और संस्थाओं को नीतियों को लागू करने में परेशानी हो सकती है। वैसे भी, किसी भी देश के नेगेटिव आउटलुक से यह पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय सिस्टम बुरे दौर से गुजर रही है। इससे आने वाले समय में राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।

 

 

 

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