इन्टरनेट पर अश्लील सामग्री की बाढ़ है, इसका मतलब यह नहीं कि आप भी OTT पर अश्लीलता की गंदगी फैलाएं – सुप्रीम कोर्ट

BY – FIRE TIMES TEAM

इस समय ओटीटी(OTT) प्लेटफॉर्म्स पर तमाम बेब सीरीज ने तहलका मचाया हुआ। अधिकतर बेब सीरीज तो सिर्फ अश्लीलता, हिंसा और गाली-गलौज ही परोस रहे हैं। कई बेब सीरीज पर विवाद भी गहराया और कुछ का विवाद ऐसा बढ़ा कि कोर्ट तक पहुंच गया।

पिछले कुछ दिनों पहले मीरा नायर निर्देशित एक बेब सीरीज A Suitable Boy रिलीज हुई थी, जिसके एक सीन को लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इसमें एक मंदिर में एक मुस्लिम लड़के को हिन्दू लड़की का चुंबन लेते दिखाया गया था।

हाल ही एक नेटफ्लिक्स पर एक बेब सीरीज एके वर्सेस एके (AK V/S AK) में वायुसेना की वर्दी को लेकर विवाद हो गया। इसमें वायुसेना ने आरोप लगाया कि अनिल कपूर ने एयरफोर्स की वर्दी उल्टी पहनी हुई है। जिसके लिए अनिल कपूर ने माफी भी मांगा।

एक विवाद और जिस पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। यह विवाद है अल्ट बालाजी (alt Balaji) पर प्रसारित एक बेब सीरीज XXX अनसेंसर्ड

आपको बता दें कि अल्ट बालाजी एकता कपूर और उनकी मां शोभा कपूर की स्वामित्व वाली कंपनी है।

इस पर शिकायतकर्ता, वाल्मीक सकारागाये, इंदौर के निवासी ने आरोप लगाया था कि वेब शो XXX सीजन 2,जो कपूर के सदस्यता-आधारित वीडियो प्लेटफॉर्म – ‘एएलटी बालाजी’ पर प्रसारित होता है, अश्लीलता फैलाता है और धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।

प्राथमिकी में एक विशेष दृश्य का भी उल्लेख किया गया है जो कथित रूप से भारतीय सेना की वर्दी को अत्यधिक आपत्तिजनक तरीके से चित्रित करता है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) ने ‘शीर्षक’ XXX’ में राष्ट्रीय प्रतीक के लिए कथित अश्लीलता और अपमान के संबंध में एएलटी बालाजी की प्रबंध निदेशक एकता कपूर के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया था, और कहा था कि प्रथम दृष्टया केस बनता है।

कपूर ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था कि उन्हें एपिसोड की सामग्री का कोई ज्ञान नहीं है क्योंकि वह निर्माता या निर्देशक नहीं हैं और उनका नाम एपिसोड के क्रेडिट में नहीं दिखता है।

इस तर्क को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि कपूर उस मंच की प्रबंध निदेशक है, जिस पर यह शो जारी किया गया था, वह एपिसोड की सामग्री के बारे में “ज्ञान रखने के लिए मानी जाती हैं।

गुरूवार को मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ कपूर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसने उनके खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक कपूर ने तर्क दिया था कि इंटरनेट अश्लीलता के बहुत अधिक स्पष्ट रूपों से भरा हुआ है और इसलिए इस सामग्री के बारे में बहुत कुछ नहीं सोचा जाना चाहिए।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की: “इंटरनेट पर अश्लील सामग्री की बाढ़ मुख्य रूप से है क्योंकि संबंधित अधिकारियों ने इस तरह की सामग्री को अलग करने और रोकने के लिए एक तंत्र नहीं बनाया है और इस तरह की विफलता को याचिकाकर्ता की ओर से वैध युक्तिकरण नहीं माना जाना चाहिए।

इस तरह की प्रस्तुतिकरण उसी समान है जैसे एक व्यक्ति एक आवासीय कॉलोनी में इस आधार पर कचरा फैलाता है कि उक्त कॉलोनी पहले से ही अस्वच्छ और गंदी है। “

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