कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने 22 साल के NDA से गठबंधन को तोड़ा

BY – FIRE TIMES TEAM

केन्द्र सरकार द्वारा पारित किसानों के कानूनों से अकाली दल और भाजपा के बीच दरार बढ़ती चली गई। प्रदेश में जैसे-2 किसानों का बिल के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। अकाली दल भी अपनी रणनीति में उसी अनुरूप बदलाव कर रही है।

9 दिन पहले NDA गठबंधन सरकार में केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री के तौर हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया था। और अब  शनिवार देर रात हुई शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी मीटिंग में शिअद ने NDA सरकार से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया।

पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग हो रही है। बादल ने कहा कि हम राजग का हिस्सा नहीं हो सकते जिसने इन अध्यादेशों को लाया है। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है कि अब शिरोमणि अकाली दल, NDA का हिस्सा नहीं है।

दरअसल, पंजाब में किसान अकाली दल का कैडर वोट है, इसे बचाने के लिए ही शिअद ने भाजपा का 22 साल पुराना अटल गठबंधन तोड़ दिया। वहीं शिअद नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव अकाली दल अकेेले ही लड़ेगा। अबतक भाजपा हमारे साथ 23 सीटों पर चुनाव लड़ती आई है। लेकिन 2022 का चुनाव बिना किसी गठबंधन के लड़ा जायेगा।

बीते शुक्रवार को अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने इन बिलों के विरोध में मलौत-दिल्ली नेशनल हाइवे को 3 घण्टे तक जाम किया। उनके साथ सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर भी शामिल रहीं।

वहां सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि हमारा काम किसानों के अधिकारों के लिए लड़ना है। हमारी पार्टी 1 अक्टूबर को तख्त दमदमा साहिब, अकाल तख्त और तख्त केशगढ़ साहिब से चंडीगढ़ की ओर किसान मार्च के तौर पर शुरूआत करेगी।

आपको बता दें कि अकाली दल बीजेपी की पुरानी सहयोगी रही है। 13 दिन की अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में भी अकाली दल ने समर्थन दिया था। अकाली दल के मुखिया रहे प्रकाश सिंह बादल NDA गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में से रहे हैं।

 

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