धूम्रपान छोड़ें अपने और अपनों के लिएः वर्ल्ड नो टोबैको डे

BY – FIRE TIMES TEAM

आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण से तबाही का खेल देख रही है। अब तक पूरी दुनिया में कोरोना के कारण 2.5 लाख से भी ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। भविष्य में भी इतनी जल्दी यह खतरा टलता नजर नहीं आ रहा है। हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जो लगातार अपनी जिन्दगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

दरअसल, हम तम्बाकू का सेवन करने वालों की बात कर रहे हैं। आज 31 मई को पूरी दुनिया में “वर्ल्ड नो टोबैको डे” मनाया जा रहा है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुरू किया था, ताकि लोगों को तम्बाकू से होने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में जागरूक किया जा सके। और इसे छोड़ने को प्रोत्साहित भी किया जा सके।

डब्ल्यू एच ओ द्वारा इस वर्ष वर्ल्ड नो टोबैको डे का थीम है, “युवाओं को इंडस्ट्री के बहकावे से बचाते हुए, उन्हें तम्बाकू और निकोटिन का उपयोग करने से रोकना है।” इस वर्ष की थीम युवाओं पर इसलिए आधारित है क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी तेजी से तम्बाकू के सेवन में आगे बढ़ रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 267 मिलियन लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं। इनमें से 28.60 प्रतिशत तम्बाकू का सेवन करने वालों की उम्र 15 वर्ष से ऊपर है। और 14.60 प्रतिशत तम्बाकू का सेवन करने वाले युवाओं की उम्र तकरीबन 13 – 15 वर्ष के बीच ही है।

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भारत में हर दिन करीब 2,500 लोग सिर्फ धूम्रपान के कारण मरते हैं। दुनिया में हर साल 70 लाख लोग तम्बाकू के कारण मौत का शिकार हो जाते हैं। और करीब दस लाख लोग सेकेंड हैन्ड स्मोकिंग (धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के आस – पास रहने वाला) के कारण मौत का शिकार हर साल होते हैं। सेकेंड हैन्ड स्मोकिंग को पैसिव स्मोकिंग भी कहते हैं।

लोग तम्बाकू दो तरह से प्रयोग करते हैं एक तो धूम्रपान जैसे बीड़ी, सिगरेट, सिगार, हुक्का। जबकि दूसरा धूम्रपान रहित यानी तम्बाकू चबाना जैसे पान, गुटका, खैनी, पान-मसाला इत्यादि। ये सभी हानिकारक हैं जिनमें करीब 4000 तरह के रसायन पाये गये हैं। उनमें से 60 से अधिक रसायन कैंसर के कारक हैं। तम्बाकू में मौजूद निकोटिन व्यक्ति को लत का शिकार बना देता है।

कौन सी बीमारियां होती हैं तम्बाकू के सेवन से: तम्बाकू हमारे स्वास्थ्य पर बहुत ही विपरीत प्रभाव डालता है। इससे ह्रदय रोग, अल्सर, स्ट्रोक, दिल की धड़कन तेज होना, दांत नष्ट होना, हड्डी टूटने में वृद्धि, मोतियबिन्द, प्रजनन क्षमता में कमी, नवजात शिशुओ में जन्मदोष, समय से पहले बूढ़ा होना ये सभी हो सकते हैं।

भारत में पुरूषों में कुल होने वाले कैंसर का 50 प्रतिशत और महिलाओं में कुल कैंसर का 25 प्रतिशत तम्बाकू के कारण जनित होता है।

डब्ल्यू एच ओ की रिपोर्ट के मुताबिक धूम्रपान करने वालों को कोविड-19 के संक्रमण से गंभीर बीमारी होने की ज्यादा संभावना रहती है। जिससे उनकी मृत्यु भी हो सकती है। धूम्रपान करने वालों का फेफड़ा बाकी लोगों के मुकाबले कमजाेर होता है। कोविड-19 का हमला मुख्यतः फेफड़ों पर ही होता है।

तम्बाकू का धूम्रपान सभी के लिए हानिकारक है, इसलिए तम्बाकू को छोड़ने का संकल्प आज ही लें। क्योंकि धूम्रपान सिर्फ आपको ही नहीं आपके आस-पास रह रहे लोगों को भी बराबर नुकसान पहुंचाता है।

 

 

 

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