डॉ.जफरुल इस्लाम ने जो कहा वो निन्दनीय लेकिन देशद्रोह का मुकदमा सही नहीं


BY- FIRE TIMES TEAM


दिल्ली के अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉ. जफरुल इस्लाम खान पर देशद्रोह के साथ-साथ आमजन की भावनाएं भड़काने का मुकदमा हो गया है। दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में रहने वाले कौशल कांत मिश्रा की शिकायत पर स्पेशल सेल थाने में मामला दर्ज कर लिया है।

कौशल कांत ने सफदरजंग थाने में शिकायत की थी जिसे वहां के एसीपी ने दिल्ली स्पेशल सेल थाने में भेज दिया। यहां आईपीसी की धारा 124ए, 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर प्रवीन कुमार को सौंपी गई है।

शिकायत में कहा गया है कि जफरुल इस्लाम के फेसबुक और ट्वीटर पर किये गए पोस्ट का कंटेंट भड़काऊ था और यह समाज में अशांति और अलगाव फैलाने के लिए था।

आपको बता दूं कि 28 मार्च को जफरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया के जरिये एक बयान जारी किया कोरोना और भारतीय मुसलमानों के बारे में जिक्र था। इसमें उन्होंने लिखा कि अगर भारतीय मुस्लिमों ने अरब देशों से उत्पीड़न की शिकायत कर दी तो शैलाब आ जाएगा।

हालांकि बाद में उन्होंने पोस्ट को डिलीट करके माफी भी मांग ली थी। उन्होंने कहा उनका पोस्ट गलत समय पर किया गया और इसे गलत तरीके से कुछ लोगों के द्वारा पेश किया गया। इसका मकसद किसी की भावनाएं आहत करने का नहीं था।

उम्मीद है अब आप पूरा मामला समझ गए होंगे। क्या अब आपको लगता है इसके लिए किसी के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा किया जाना चाहिए?

हर रोज लाखों पोस्ट सोशल मीडिया पर ऐसी आती हैं जो लोगों की भावनाएं आहत करती हैं व देश के खिलाफ होती हैं। क्या उन सब के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा होता है? आपका उत्तर होगा बिल्कुल नहीं। जी हाँ जब आप ऐसे लोगों को तलाश कर गिरफ्तार भी नहीं कर पा रहे हैं जो दिन-रात भारत में लड़ाने का काम करते हैं। तब आप सिर्फ कुछ लोगों को टारगेट कर उनपर कार्यवाही क्यों?

जब अर्णब सोनिया गांधी को लेकर कह रहे थे कि वह इटली को रिपोर्ट भेजेंगी तब उनपर देशद्रोह का मुकदमा नहीं होना चाहिए था? तब हम लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहे थे। अब क्यों नहीं हम अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात कर रहे हैं। क्या अब अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं खत्म हो रही?

 

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