COVID-19: गरीबों को राहत देने के लिए सरकार ने ‘पर्याप्त के करीब कुछ भी नहीं किया’: अभिजीत बनर्जी

BY- FIRE TIMES TEAM

कोरोना महामारी के चलते भारत में हुए देशव्यापी लॉक डाउन का प्रतिकूल प्रभाव सबसे अधिक गरीब वर्ग के लोगों पर पड़ा है जिनके पास कोई जमा पूंजी नहीं है।

ये वो वर्ग है जो रोज कमाता और खाता है और लॉक डाउन की वजह से आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है क्योंकि न तो अब कोई काम है करने को न ही इतनी धनराशि है कि जहां हैं वहां अपना जीवन यापन कर सकें।

दूसरे प्रदेशों के फंसे हजारों प्रवासी मजदूर पैदल ही आने घर की ओर आने को भी मजबूर हैं क्योंकि अभी तक उनके लिए कोई खास परिवहन व्यवस्था भी सरकार की तरफ से नहीं की गई है।

भारत में गरीब वर्ग को लेकर नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉक डाउन किया लेकिन इसका प्रतिकूल प्रभाव गरीबों पर हुआ और उनको राहत देने के लिए “पर्याप्त के करीब कुछ भी नहीं” किया है।

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में, बनर्जी ने कहा कि भारत सरकार को आगे क्या किया जाना चाहिए, इस बारे में अच्छी तरह से स्पष्ट योजना पर विचार करने की आवश्यकता है।

बनर्जी ने कहा, “यह बीमारी लंबे समय तक रहने वाली है जब तक कि इसकी वैक्सीन नहीं आती है, जो जल्द नहीं आने वाली है।”

उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि पहले ही मंदी के दौर से गुजर रही है। इसके बाद कोरोनोवायरस के प्रकोप से आजीविका का नुकसान हुआ है जिसके परिणामस्वरूप अब अतिरिक्त मांग में कमी आई है।

बनर्जी ने बताया, “मुझे पता है कि लोगों को पैसे देने का क्या फायदा है, जब बाजार बंद होते हैं।”

उन्होंने कहा, “बाजार शुरू करने के लिए, आप लोगों को बता सकते हैं कि पैसा आ रहा है। लोगों को आश्वासन की जरूरत है। और सरकार को लोगों को आश्वस्त करने में सक्रिय होना होगा।”

बनर्जी ने कहा कि भारतीय प्रशासन को आय के नुकसान के कारण गरीबी का सामना करने वालों को पैसे देने के लिए अधिक उदार होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “भारत में पहले से चल रही कई कल्याणकारी योजनाओं के प्राप्तकर्ता के रूप में पहले से ही सूचीबद्ध लाखों घर ऐसे नकद लाभ के लिए पात्र होंगे।”

“बड़ी संख्या में ऐसे लोग जो इस तरह की योजनाओं के लाभार्थी नहीं हैं, उनकी पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय सामुदायिक रिपोर्टिंग तंत्र हो सकते हैं कि पैसा उनकी जेब तक पहुंचे।”

अभिजीत बनर्जी ने स्वीकार किया कि लाभ पाने वालों की पहचान करने में गलतियाँ शामिल होंगी।

उन्होंने मानते हुए कहा, “हम समय में इस बिंदु पर सही होने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। यह एक आपातकालीन स्थिति है।”

बनर्जी ने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह, भारत को भी कल्याणकारी लाभों के विस्तार के लिए पैसा जमा करना चाहिए।

बनर्जी ने कहा, “संभवतः मुद्रास्फीति का डर है, जब वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति नहीं होती है। लेकिन भारत को आय के अंतर के बारे में कुछ करना होगा। सरकार को पैसा खर्च करने के बारे में अधिक सोचना चाहिए।”

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