संविधान दिवस विशेषः राजनीति में व्यक्ति विशेष की पूजा क्षरण और अंततः तानाशाही का एक रास्ता है – Dr. B R Ambedkar

BY – FIRE TIMES TEAM

आज 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की शुरूआत केन्द्र सरकार ने 2015 में 19 नवंबर को एक गजट के माध्यम से की थी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा वर्ष 1979 में एक प्रस्ताव के बाद से इस दिन को ‘राष्ट्रीय कानून दिवस’ (National Law Day) के रूप में जाना जाने लगा था।

भारत की संविधान सभा की स्थापना 9 दिसंबर 1946 को भारत के संविधान को लिखने के लिए की गई थी। मसौदा समिति (Drafting Committee) की अध्यक्षता डॉ.भीम राव अंबेडकर ने की थी।

मसौदा समिति के अध्यक्ष बीआर अंबेडकर ने 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा की कार्यवाही शुरू होने से एक दिन पहले  एक भाषण दिया था इस भाषण में भविष्य के लिए तीन चेतावनी दी थी।

अंबेडकर ने कहा, “धर्म में भक्ति एक आत्मा के उद्धार के लिए एक रास्ता हो सकती है । लेकिन राजनीति में भक्ति या नायक की पूजा क्षरण और अंतत तानाशाही के लिए एक निश्चित रास्ता है ।

उनकी अंतिम चेतावनी यह थी कि भारतीयों को राजनीतिक लोकतंत्र से संतुष्ट नहीं होना चाहिए क्योंकि भारतीय समाज में असमानता और पदानुक्रम अभी भी समाहित थे।

उन्होंने कहा, “अगर हम लंबे समय तक इसे (समानता) से इनकार करते रहेंगे तो हम अपने राजनीतिक लोकतंत्र को संकट में डालकर ही ऐसा करेंगे।

लेकिन मौजूदा समय में एक ही नाम के रंग से पूरे देश में राजनीतिक दुनिया को रंगने का काम किया जा रहा है। मौजूदा सरकार इसका एक सटीक उदाहरण है।

ऐसे में राजनीति और लोकतंत्र का सफर बाबा साहेब बीआर अंबेडकर के बताये रास्ते से बिल्कुल उलट जा रहा है। लोग तो बाबा साहेब के नाम का प्रयोग भी बाकायदा राजनीति के लिए करने लगे हैं।

 

 

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