IAS टॉपर टीना डॉबी और अतहर की शादी को लव जिहाद कहना कितना सही?

BY- आर पी विशाल

यूपीएससी 2015 की टॉपर रही टीना ढाबी और दूसरे स्थान पर रहे अतहर आमिर की 2018 में आपस में शादी हो गई थी और अब 2020 में जयपुर के कोर्ट में तलाक की अर्जी दी है। कुछ लोगों ने इस विषय को भी लव जेहाद से जोड़ दिया है।

इस रिश्ते के टूटने की वजह सामाजिक व धार्मिक मामले भी हो सकते हैं हालांकि इन्होंने वैचारिक मतभेद कारण बताया है लेकिन जो भी हों पर इसे लव जिहाद कहना उचित नहीं होगा क्योंकि एक यूपीएससी टॉपर को यदि इतना भी सही गलत पता न हो यह कहना मूर्खता होगी।

पहली बात यह कि दोनों का आपसी निजी मामला है इसे इस तरह से मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। पर भारत में एक विधायक मिश्रा जी की बेटी ने दलित लड़के से शादी की मुद्दा तो तब भी बनाया गया।

इन्होंने एक दूसरे के बारे में सबकुछ जानते हुये शादी की। इसके बावजूद सम्भव है कि कुछ चीजें अब जाकर भी समझ आ रही होंगी। कोई भी दो भिन्न विचारों और संस्कारों के लोगों को आपस में तालमेल बिठाना मुश्किल होता है और यह बात इंसानों को पहले ही समझनी चाहिये।

शादी, तलाक आदि यह सब निजी फैसले व निजी जीवन से सम्बंधित होते हैं। मैंने आजतक केवल इनकी काबिलियत और उपलब्धि पर ही लिखा इसके अलावा न कभी इनकी शादी के विषय पर कुछ लिखा, न इनकी तलाक के विषय पर क्योंकि यदि इतना लिखूं तो फिर मुझे इनकी धार्मिक समझ पर भी लिखना पड़ता।

एक आईएसएस होकर किसी कुर्सी पर बैठने से पहले हवन, यज्ञ, पूजा, पाठ करती है जबकि दूसरा नमाज, रोज़े रखता है। यह सब निजी विषय था इसलिए निजी रखा अन्यथा इतना पढ़ लिखकर यदि आप उस ढोंग से बाहर नहीं निकल सके और उसका सार्वजनिक प्रदर्शन भी कर रहे तो इसका अर्थ यह हुआ यूपीएससी टॉप करना भी समझदारी के मानक पूरा करना नहीं हुआ।

उसी नासमझी में आज दोनों का रिश्ता तलाक पर आकर रुक गया। यह विषय मुस्लिम समुदाय के प्रति भी एक सोचनीय दृष्टिकोण प्रदर्शित करता है क्योंकि उनके रग-रग में धर्म का कट्टरपन घुस गया जिसके चक्कर में वे सबकुछ बर्बाद करते चले जा रहे हैं। उनकी यही कट्टरपंथी सोच एकदिन उन्हीं के लिए मुसीबत बनेंगी यह उनको खुद ही समझना होगा।

टीना ढाबी की बात करूं तो यह सच है कि उसे सामाजिक ताने, बाने की समझ कम है। उसे अपने ही समाज की ठीक से जानकारी नहीं तो दूसरे समाज के प्रति क्या समझ होगी इससे यह बात भी प्रमाणित हो गई।

इसीलिए कहता हूं कि अंतर्धार्मिक या अन्तर्जातीय विवाह जब कोई करें तो वह धार्मिक रीति रिवाज से कतई न करें और आगे भी धर्म को तरजीह न दें यकीन कीजिए कभी कोई समस्या नहीं आएंगी। अन्यथा यह होना स्वाभाविक है।

जहां तक लव जेहाद का सम्बंध है तो वह भी एक समस्या हो सकती है पर ऐसे मामलों में नहीं। यह विषय उस तरह के होते हैं जैसे कोई पहाड़ी परिवार एक शहरी बहु लाता है तो बहु की गलती पर उसके ससुराल पक्ष सभी शहरियों को गाली देते है और इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शहर की सभी लड़कियां या सभी लोग घटिया होते हैं।

यही क्षेत्रवाद, पूंजीवाद की मानसिकता में भी होता है। अमीर, गरीब सबकी यही मानसिकता होती है कि वह उसके खानदान, संस्कार, परिवार सबको निशाने पर लेते हैं लेकिन जाति और धर्म के मामलों में यह विषय और ज्यादा भारी लगते हैं क्योंकि यहां सुनना, सम्भालना केवल बेइज्जती ही नहीं लगती बल्कि अस्तित्व, अहंकार, आत्मसम्मान की लड़ाई बन जाती है।

जिसका निष्कर्ष कई सवाल और कई कलह पैदा करते हैं और अंत दुःखद होता है क्योंकि यह भारतीय वैचारिक समस्या है, विश्वव्यापी धार्मिक या सांस्कारिक नहीं।

फेसबुक पेज से साभार

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