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बिहार चुनावः ऑनलाइन बनाए जा रहे फर्जी वोटर कार्ड की जालसाजी का भंडाफोड़, चुनाव आयोग ने दिए जांच के आदेश

BY – FIRE TIMES TEAM

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग इसी हफ्ते में कर सकता है। लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर आ रही है कि देश में फर्जी इपिक (फर्जी मतदाता पहचान पत्र) बनाने के खेल का भंडाफोड़ हुआ है। जालसाजों द्वारा वोटर आईकार्ड ऑनलाइन बनाये जा रहे हैं।

इस जालसाजी को साईबर कैफे, बेबसाइट और यूट्यूब के जरिए ऑनलाइन चलाया जा रहा है। पहली बार यह मामला कर्नाटक के वेल्लारी में आने के बाद हुई जांच में पता चला कि पूरे देश में इस जालसाजी का नेटवर्क फैला हुआ है।

चुनाव आयोग के सचिव अजय कुमार ने इसके बाद देश के सभी राज्यों में जांच और कठोर कार्यवाई के आदेश दिए हैं। आयोग ने बिहार में भी इसकी सघन जांच और तुरंत कार्यवाई शुरू कर दी है।

इस जालसाजी की पुष्टि के लिए जब बेबसाइट और यूट्यूब को खंगाला गया तो इस तरह के दर्जनों लिंक मिले, जहां निर्धारित राशि लेकर फर्जी इपिक बनाने का काम हो रहा था। पूरे देश में फैले इस नेटवर्क को देखकर कर्नाटक के चुनाव अधिकारी ने पूरे देश में इस मामले की जांच की अनुशंसा की और कहा कि इस खेल से देश की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया को खतरा है।

आखिर में इपिक (EPIC) होता क्या है ?

दरअसल इपिक का पूरा नाम Election Photo ID Card यानि कि जो वोटर आईकार्ड आपको दिया जाता है। इस वोटर आई कार्ड में एक खास आईडी नंबर होता है, जो हर व्यक्ति के कार्ड का अलग-2(यूनीक) नंबर होता है। इसी को इपिक नंबर कहा जाता है, जो कि अल्फा न्यूमेरिक में होता है और वोटर आईडी कार्ड पर अंकित होता है।

इसी इपिक नंबर से वोटर लिस्ट में अपना नाम पता किया जा सकता है। और यदि आपका वोटर कार्ड खो गया है तो इसी इपिक नंबर को बताकर डुप्लीकेट आईडी कार्ड बनवाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए आपको कलेक्टर ऑफिस जाना पड़ता है।

EPIC का इस्तेमाल आधार कार्ड बनवाने, बैंक एकाउंट खुलवाने, मोबाइल सिम लेन और पासपोर्ट बनवाने जैसे तमाम कामों में होता है। चुनाव प्रक्रिया में तो इसका प्रयोग खासतौर पर किया ही जाता है।

कैसे हुआ खुलासा ?

दरअसल, 25 अगस्त को एक युवक वेल्लारी के आधार निर्माण केन्द्र पर पहुंचा। आधार कार्ड के लिए उसने अपने EPIC की फोटोकॉपी प्रस्तुत की। ओरिजनल EPIC मांगने पर उसने बताया कि उसका EPIC खो गया है। 11 बजे इस बातचीत के बाद वह अपना आवेदन करके चला गया।

और 5 घंटे बाद वही व्यक्ति एक नए EPIC के साथ दोबारा आधार कार्ड के लिए आवेदन दिया। शक होने पर उसे आधार के लिए दूसरे दिन बुलाया गया, पूछताछ में उसने EPIC बनाने वाले का पता दे दिया। इसके बाद चुनाव आयोग का कर्मी वहां ग्राहक बनकर गया तो उसे भी नया EPIC मिल गया।

फर्जी EPIC नंबर बनाने के लिए यूट्यूब पर तमाम वीडियो हैं जिनमें दर्जन भर से ज्यादा बेबसाइट का लिंक है। इस बेबसाइट्स पर फर्जी EPIC बनाने और उसके शुल्क की जानकारी है। इसके अलांवा देशभर में उसके सेंटर्स की भी जानकारी दी गई है। फर्जी EPIC पर चुनाव अधिकारी के भी नकली हस्ताक्षर मिले हैं। चुनाव अधिकारियों ने गूगल पर Print Portal टाइप कर इन बेबसाइट के बारे में तमाम जानकारी खंगाली।

 

 

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