नजरिया

मोदी जी सरकारी फैक्ट्रियां बेच ही नहीं रहे, इस पर गर्व का गरबा भी कर रहे हैं

 BY- बादल सरोज प्रचलन में यह है कि दशहरे के दिन अस्त्र-शस्त्रों की पूजा होती है। मगर जैसा कि विश्वामित्र कह गए हैं : “कलियुग में सब उलटा पुलटा हो जाता है।” वही हो रहा है। इस दशहरे पर मोदी जी हिन्दू धर्म के स्वयंभू संरक्षक मोदी जी, राष्ट्रवाद की …

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राजा महेंद्र प्रताप की वो बातें जो आपको जानना चाहिए

 BY- बादल सरोज दुनिया भर में वंश चलाने के लिए वारिस गोद लेने का रिवाज है। जो संतानहीन होते हैं या स्वयं की संतान को जन्मने के झंझट से बचना चाहते हैं, वे वारिस को गोद ले लेते हैं। मगर ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा और उसका मातृ-पितृ संगठन, …

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लखीमपुर खीरी में जो जिस तरह से किया गया है, उसका एक और उद्देश्य है किसानों को उकसाना

 BY- बादल सरोज गांधी के जन्म दिवस के ठीक अगले दिन लखीमपुर खीरी में विरोध प्रदर्शन करके वापस लौट रहे किसानों को गाड़ियों से रौंदने का, निर्ममता के फ़िल्मी दृश्यों को भी पीछे छोड़ देने का, जो कांड घटा है, वह एक लम्पट अपराधी से अमित शाह का दो नंबर …

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गांधी मरते क्यों नहीं हैं..?

BY- पुनीत सम्यक यह एक यक्ष प्रश्न है जिसका आज तक उत्तर न मिल सका है,ना मिलने की उम्मीद है। 30 जनवरी 1948 के पहले भी गांधी के शरीर को मारने के अनेक प्रयास किए गए। उनकी देह को गोली मारने के बाद भी एक वर्ग उन को समाप्त करने के …

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टुकड़ों में देखने से अपनी पसंद या नापसंद के गांधी को तो ढूंढ सकते हो मगर गांधी को नहीं समझ सकते

 BY- बादल सरोज किसी भी व्यक्ति या विचार का मूल्यांकन करने का सही तरीका उसे उसके देश-काल में – टाइम एंड स्पेस में – बांधकर समझना है। गांधी को समझना है, तो उन्हें भी उस समय की परिस्थितियों के साथ जोड़कर देखना होगा। गांधी की एक मुश्किल यह है कि …

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सकल घरेलु उत्पादन नहीं, सकल फोटो उत्पादन के लिए मोदी याद किए जाएँगे: रवीश कुमार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति ख़ास तरह की दृश्य व्यवस्था( visual order) की राजनीति है। इसके केंद्र में होना महत्वपूर्ण नहीं है। होते हुए दिखना महत्वपूर्ण है। दृश्य इतना विराट है कि उसके आस-पास लोग नज़र नहीं आते हैं। इस कड़ी में आप में 2014, 2019 में उनके शपथ ग्रहण …

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ट्रंप के बाद अब बाइडन के सामने भी गोदी मीडिया को लेकर अपमानित होना पड़ा मोदी को

“मुझे लगता है कि वे प्रेस को यहां लाने जा रहे हैं। भारतीय प्रेस अमरीकी प्रेस की तुलना में कहीं ज़्यादा शालीन है। मैं सोचता हूं, आपकी अनुमति से भी, हमें सवालों के जवाब नहीं देने चाहिए क्योंकि वे बिन्दु पर सवाल नहीं करेंगे” इस कथन को ध्यान से पढ़िए।इसके …

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जयप्रकाश नारायण को उन्हीं की स्मृति में स्थापित छपरा के जयप्रकाश विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के सिलेबस से हटा दिया

 BY- बादल सरोज मध्यप्रदेश में एमबीबीएस के छात्रों को अब आरएसएस संस्थापक हेडगेवार और जनसंघ के संस्थापक नेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचार पढाए जाएंगे। चिकित्सा शिक्षामंत्री ने इस घोषणा के लिए तारीख सरकारी शिक्षक दिवस  5 सितम्बर की चुनी। बकौल उनके ये विचार एमबीबीएस के फाउंडेशन कोर्स में मेडिकल …

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भारत का बॉर्डर तस्वीर मोरक्को और स्पेन की सीमा की तो लखनऊ की जगह कोलकाता के फ्लाईओवर की तस्वीर क्यों नहीं छप सकती है?

 BY- रवीश कुमार जब ख़बर में झूठ चल सकता है तो विज्ञापन में झूठ क्यों नहीं चल सकता। जो समाज गोदी मीडिया के प्रोपेगैंडा को सच मान कर ख़बर देख रहा है उसे समाज विज्ञापन में झूठे प्रोपेगैंडा को सच मानना ही चाहिए। जो लोग यूपी सरकार के विज्ञापन की …

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आरएसएस ने अपने एकमात्र चिंतक-विचारक सावरकर को जब तक जीवित रहे अपना नहीं माना

BY : बादल सरोज आरएसएस और भाजपा की दीदादिलेरी काबिलेगौर है। वे जितनी फटाफट द्रुत गति से अपने मुखौटे उतार रहे हैं, उससे जिन्हे अब भी यह भ्रम था कि पहले तोहमतें लगाकर बदनाम करना, उसके बाद नफरतें उभारना और आखिर में मॉब-लिंचिंग कर निबटा देने का काम सिर्फ किसी …

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