‘किसान विरोधी’ कानून के चलते भाजपा की राजस्थान की सहयोगी राष्ट्रीय जनता पार्टी एनडीए से हुई अलग

BY- FIRE TIMES TEAM

राष्ट्रीय जनता पार्टी शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग हो गई। मुद्दा केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध है जिसके चलते पार्टी ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया।

पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल, जो राजस्थान के नागौर से लोकसभा सांसद भी हैं, ने कहा कि कृषि कानून “किसान विरोधी” थे। बेनीवाल ने कहा कि वह एनडीए के साथ नहीं रहेंगे और कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगे।

अलवर जिले के शाहजहांपुर में किसान रैली को संबोधित करते हुए 48 वर्षीय नेता ने कहा कि वह किसी का समर्थन नहीं करेंगे। “मैं एनडीए के साथ फेविकोल से नहीं जुड़ा हूं। आज, मैं खुद को एनडीए से अलग करता हूं।”

इंडिया टुडे के अनुसार बेनीवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें सितंबर में संसद के मानसून सत्र से बाहर रखा गया था और कृषि कानून उनकी अनुपस्थिति में लाए गए थे।

उन्होंने कहा, “अगर मैं कृषि कानूनों को लाने के दौरान लोकसभा में मौजूद होता, तो मैं उन्हें फाड़कर फेंक देता।”

RLP शिरोमणि अकाली दल के बाद  कृषि कानूनों के विरोध के चलते एनडीए छोड़ने वाली राष्ट्रीय जनता पार्टी दूसरी राजनैतिक पार्टी है। और अब सबने किसानों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है।

पंजाब में भाजपा के सहयोगी ने सितंबर में एनडीए से नाता तोड़ लिया था। SAD नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी अपना कैबिनेट पद छोड़ दिया था।

इस बीच, पूर्व लोकसभा सांसद हरिंदर सिंह खालसा ने भी प्रदर्शनकारी किसानों और उनके परिवारों की पीड़ा के प्रति अपनी “असंवेदनशीलता” के कारण भाजपा से इस्तीफा दे दिया।

अधिकतर पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान एक महीने से दिल्ली में कानून के खिलाफ महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदुओं पर विरोध कर रहे हैं और इस कड़ाके की ठंड में बैठे हैं।

शनिवार को उन्होंने कानूनों पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए बातचीत के लिए केंद्र की पेशकश स्वीकार कर ली।

किसानों को डर है कि कृषि सुधारों से न्यूनतम समर्थन मूल्य तंत्र कमजोर हो जाएगा, जिसके तहत सरकार कृषि उत्पाद खरीदती है, फसल-मूल्य निर्धारण को बढ़ावा मिलेगा, उन्हें उनकी उपज के लिए उचित दाम नहीं मिलेगा और उन्हें कॉरपोरेट की दया पर छोड़ दिया जाएगा।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि नए कानून किसानों को अपनी उपज बेचने, बेहतर मूल्य निर्धारण, और उन्हें एकाधिकार से मुक्त करने के अधिक विकल्प देंगे। सरकार ने दावा किया है कि सितंबर में पारित कानून का उद्देश्य खरीद प्रक्रियाओं को पूरा करना और बाजार को खोलना है।

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