‘बॉयज लॉकर रूम’ मामले में नए मोड़ ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं?

BY-हर्षिल जैन

महिला सुरक्षा से जुड़ा ‘बॉयज लॉकर रूम’ मामला एक नए मोड़ पर आ गया है। दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में पूरी सच्चाई नहीं बताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार एक नाबालिक लड़की ने ‘सिद्धार्थ’ नाम से फ़र्ज़ी प्रोफाइल बनाकर ख़ुद के बारे में अभद्र टिप्पणीयाँ करी थी। लड़की ने कहा कि इसके पीछे उसका मकसद था अन्य लड़को के इरादों का पता लगाना।

वह लड़की सिद्धार्थ नाम से दूसरे लड़कों को मैसेज करती थी जिसमें वह स्वयं के बारे में अभद्र बातें करती थी। हालांकि उसकी इस नासमझी का खुलासा तब हुआ जब एक लड़के ने फ़र्ज़ी प्रोफाइल से हुई चैट का स्क्रीनशॉट लेकर अपने दोस्तों को भेज दिया और उस लड़की को भी जिसके बारे में बात की जा रही थी।

चूंकि वह लड़की यह जानती थी कि सिद्धार्थ नाम की प्रोफाइल फ़र्ज़ी है इसलिए उसने कोई शिकायत नहीं की। लेकिन एक अन्य व्यक्ति ने इस स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

बॉयज लॉकर रूम और यह मामला एक ही वक़्त पर होने से जनता में काफ़ी भ्रम फैला जिसके कई दुष्परिणाम भी लोगों को झेलने पड़े।

दिल्ली पुलिस ने बॉयज लॉकर रूम से जुड़े 24 लोगों के डिवाइस जांच के लिए ज़ब्त कर लिए हैं। ग्रुप के एडमिन और एक वयस्क को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक नाबालिक लड़के से भी पूछताछ की गई है।

पुलिस के मुताबिक संबंधित ग्रुप पर लड़कियों के एडिट किये गए फ़ोटो शेयर किए जाते थे और ग्रुप के कुछ सदस्य उन फ़ोटो पर अभद्र टिप्पणीयाँ करते थे। हालांकि लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने या उन पर हमला करने की कोई चैट पुलिस को नहीं मिली है।

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गौर करने वाली बात यह है कि इस ग्रुप के स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर साझा करने वाले लोगों ने बिना सच्चाई जाने फ़र्ज़ी प्रोफाइल से हुई चैट को भी शेयर कर दिया। उनके द्वारा यह भ्रम फैलाया गया कि उनकी जान को खतरा है। इस लापरवाह कृत से आम जनता को गुमराह किया गया।

इसका खामियाज़ा उन सभी लड़कियों को उठाना पड़ा जिनकी तस्वीरों को उस ग्रुप पर शेयर किया गया था। एक तरफ जनता ने इस भ्रामक प्रचार करने वाले लोगों को सोशल मीडिया पर खरीखोटी सुनाई तो वहीं फेमिनिज्म के ख़िलाफ़ टिप्पणीयाँ भी करी हैं।

हमें इस बात से सबक लेना होगा कि निजी स्वार्थ के लिए कुछ लोगों द्वारा किये गए लापरवाह और गुमराह करने वाले कृत से हम महिला सुरक्षा के लिए उठाए गए वास्तविक कदमों पर सवाल खड़े ना करें।

भारत में महिला सुरक्षा का मुद्दा बहुत अहम है और इसके लिए सभी को एकजुट होकर महिलाओं के हक़ और सुरक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी और इस दिशा में अधिक प्रभावशाली कदम उठाने होंगे। अब यह जनता की ज़िम्मेदारी है कि भारत को महिलाओं के लिए बेहतर देश बनाया जाए एवं उन पर हो रहे ज़ुल्म और उत्पीड़न का मुंहतोड़ जवाब दें।

इस समस्या का हल क़ानूनी तरीके से निकालना अतिमहत्वपूर्ण है। हमें इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि क़ानूनी न्याय के साथ महिलाओं को सामाजिक न्याय भी मिले अर्थात समाज में बराबरी के भाव के साथ मानसिक रूप से भी बदलाव को स्वीकृति देनी होनी।

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